दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र

दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र 
शाश्वत दिनचर्या  हम वर्तमान  पार्थिव जीवन सूर्यालोकित आकाश के नीचे जी रहे हैं । सूर्य सतत प्रकाशित रहता है लेकिन धरती पर समय की घड़ियाँ सूर्य प्रकाश के आलोक के अनुसार सुबह, दिन, पूर्वाह्न, दोपहर, अपराह्न, शाम और रात्रि काल के नामों से जाना जाता है । प्रत्येक क्षण सूर्य के प्रकाश की मात्रा धरती पर घटते बढ़तें रहतीं हैं । तदनुरूप मानव जाति जीने की कला विकसित करते आ रही है ।काल परिवर्तन के अनुकूल जीवन जीने से हम दीर्घायु हो रहें है । काल परिवर्तन के प्रतिकूल जीवन अल्पायु होने लगता है । अन्ततोगत्वा जीवन निष्क्रिय हो जाता है अर्थात मृत घोषित कर दिया जाता है । पार्थिव शरीर धरती के मूल अवयवों में विलीन हो जाता है । हम मानव पार्थिव जीवन के इन सत्यों को अस्वीकार नहीं कर सकते हैं । दुसरी ओर सतत आनन्द और काल परिवर्तन के अनुकूल सतत, हरेक क्षण आराम से जीने की इच्छा रहती हैं ।जीने की इस इच्छा के अनुसार ही जीवन जीने की कला को शाश्वत जीवन या अमर जीवन निर्वहन कहा गया है । धरती पर काल के अनुसार जीवन निर्वहन करना मानव जाति के लिए वाध्यता है, यह अपूर्ण सत्य है ।  पूर्ण सत्य है कि हमारा “सूर्य” सतत प्रज्ज्वलित है “प्रकाशमान” है।  मानव को तदनुरूप धरती पर काल परिवर्तन के अनुकूल जीवन जीते हुए, सतत प्रज्ज्वलित प्रकाशमान सूर्य की तरह “सकारात्मक” जीवन जीने की कला विकसित करना हि आज की अनिवार्य आवश्यकता है । 

लक्ष्य “राम जानकी संस्थान के युवा सकारात्मक योद्धा ” विधिवत सकारात्मक जीवन निर्वहन हेतु दैनिक शाश्वत दिनचर्या का अभ्यास करते हैं ।नव सकारात्मक योद्धाओं के साथ सहयोग वृद्धि के लिए 
कार्य पुस्तिका पृष्ठ 1  
 दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र : 1- 34 
ध्यान यज्ञ साधना सत्र: 420-453  दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र : 1 
लक्ष्य:-  
“परमानंद आकाशीय जीवन निर्वहन”
 कामनाः-
  मै स्वयं के मन से चाहता हूँ कि शाश्वत दिन के सूर्य को देखूँ।
 प्रार्थनाः- 
ओ, मेरे अस्तित्व के देव! कृपा बनाए रखें ।मानव जीवन सतत अमर प्रकाश के घेरे में  व्यतीत हो। । 
परिणामः-
 मानव स्वयं प्रकाश के मालिक होंगे ।प्रकाश हि स्वयं की सामर्थ्य रहेंगी । अंधकार स्वीकार नहीं किए जायेगा ।असमर्थता को किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे । इस तरह जीवन निर्वहन करते रहने से सामान्य नकारा स्वभाव पर निरपेक्ष आनन्द सदैव हावी रहेगा ।स्वभाव शाश्वत प्रकाश से नियंत्रित व सक्रिय होगा ।
 जय सच्चिदानंद
[08/06, 7:03 pm] U. K. Manna RJS: 420

दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र : 1- 34

ध्यान यज्ञ साधना सत्र: 420-453 

दैनिक शाश्वत जीवन जीने के अभ्यास सत्र : 1

लक्ष्य:-

 “परमानंद आकाशीय जीवन निर्वहन”

कामनाः-

 मै स्वयं के मन से चाहता हूँ कि शाश्वत दिन के सूर्य को देखूँ।

प्रार्थनाः-

ओ, मेरे अस्तित्व के देव! कृपा बनाए रखें ।मानव जीवन सतत अमर प्रकाश के घेरे में  व्यतीत हो।
परिणामः-

मानव स्वयं प्रकाश के मालिक होंगे ।प्रकाश हि स्वयं की सामर्थ्य रहेंगी । अंधकार स्वीकार नहीं किए जायेगा ।असमर्थता को किसी भीपरिस्थिति में स्वीकार नहीं करेंगे । इस तरह जीवन निर्वहन करते रहने से सामान्य नकारा स्वभाव पर निरपेक्ष आनन्द सदैव हावी रहेगा ।स्वभाव शाश्वत प्रकाश से नियंत्रित व सक्रिय होगा ।

जय सच्चिदानंद

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