क्रांतिकारी विरासत और आधुनिक संसाधन संकट के बीच वैचारिक समन्वय: आरजेएस पीबीएच ने बिहार दिवस,शहीद दिवस और विश्व जल दिवस पर किया सकारात्मक सोच का आह्वान.
क्रांतिकारी विरासत और आधुनिक संसाधन संकट के बीच वैचारिक समन्वय: आरजेएस पीबीएच ने बिहार दिवस,शहीद दिवस और विश्व जल दिवस पर किया सकारात्मक सोच का आह्वान.
आरजेएस पीबीएस आगामी 26 ,27 ,29 और 31 मार्च को क्रमशः रामनवमी, अशोक जयंती, रंगमंच दिवस , सकारात्मक संवाद और महावीर जयंती का कार्यक्रम आयोजित करेगानई दिल्ली - भारत की क्रांतिकारी विरासत को वर्तमान की पारिस्थितिक और सामाजिक चुनौतियों से जोड़ने के एक निर्णायक प्रयास के तहत, राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) ने अपने 532वें कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस कार्यक्रम ने सकारात्मक भारत उदय आंदोलन के तहत अगस्त 2026 में दिल्ली में होने वाले विशाल इंडिपेंडेंस समारोह की घोषणा की। इस आगामी भव्य आयोजन में आरजेएस पीबीएच की सातवीं पुस्तक ग्रंथ 07 का विमोचन किया जाएगा, जो गणतंत्र दिवस से स्वतंत्रता दिवस तक की राष्ट्र की यात्रा का दस्तावेजीकरण करेगी और इसे आधिकारिक रूप से सेवा तीर्थ को समर्पित किया जाएगा।
आरजेएस पीबीएच के संस्थापक और कार्यक्रम के संचालक उदय कुमार मन्ना ने घोषणा की कि यह आंदोलन अब अपने वैचारिक क्रांति के ग्यारहवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि इस आंदोलन का उद्देश्य प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि से आगे बढ़कर क्रांतिकारी मूल्यों का व्यावहारिक अनुप्रयोग करना है। कार्यक्रम में शहीद दिवस, बिहार दिवस और विश्व जल दिवस का एक साथ आयोजन किया गया, जिसका मुख्य तर्क यह था कि राजनीतिक स्वतंत्रता का संघर्ष अब संसाधन संप्रभुता और मानसिक मुक्ति के संघर्ष में बदल गया है।कार्यक्रम के सह-आयोजक और टाटा स्टील बीएसएल के पूर्व उपाध्यक्ष और रुड़की के आईआईटीयन राकेश कुमार मौर्य ने विश्व जल दिवस 22 मार्च पर तकनीकी और नीति-आधारित दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने बताया कि कि ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में स्थानीय अधिकारी जल संरक्षण को व्यावहारिक रूप से कैसे लागू कर सकते हैं?
राकेश कुमार मौर्य ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को नीति-आधारित संरक्षण के एक मॉडल के रूप में उद्धृत किया। प्राधिकरण ने एक अनिवार्य नियम लागू किया है कि जब तक किसी घर या कारखाने के नक्शे में वर्षा जल संचयन प्रणाली (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) शामिल नहीं होगी, उसे मंजूरी नहीं दी जाएगी। भविष्य के दशकों में शहरी केंद्रों को जीवित रखने के लिए स्वैच्छिक जागरूकता से कानूनी प्रवर्तन की ओर यह संक्रमण आवश्यक है।क्रांतिकारी युग का गहन विश्लेषण शहीद भगत सिंह के भांजे और शहीद भगत सिंह सेंटरिनरी फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रोफेसर जगमोहन सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.जगमोहन ने शहीदों के उस चित्रण को चुनौती दी जो उन्हें केवल हिंसा के प्रतीकों के रूप में देखते हैं। इसके बजाय, उन्होंने उन्हें गहन विचारकों और रणनीतिकारों के रूप में प्रस्तुत किया। प्रोफेसर सिंह ने लाहौर जेल में जतिन दास के 63 दिनों के भूख हड़ताल का विवरण दिया, जो केवल भोजन के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक कैदियों की गरिमा और पढ़ने-लिखने के मौलिक अधिकार के लिए थी।
प्रोफेसर सिंह ने खुलासा किया कि भगत सिंह की जेल नोटबुक में पहली प्रविष्टि 12 सितंबर को की गई थी, जो जेल की दीवारों के भीतर भी आंतरिक स्वतंत्रता की एक काव्य घोषणा थी। उन्होंने साझा किया कि भगत सिंह एक उत्साही पाठक थे जिन्होंने अपने कारावास के दौरान 300 से अधिक पुस्तकें पढ़ीं। इसमें गोरखपुर में श्रम शोषण और असम के चाय बागानों के संबंध में सी.एफ. एंड्रयूज के कार्य शामिल थे। प्रोफेसर सिंह के अनुसार, आधुनिक युवाओं को साम्राज्यवाद और सामाजिक असमानता की जटिलताओं को समझने के लिए इसी बौद्धिक नींव की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान भगत सिंह के जीवन से जुड़े कुछ सबसे चर्चित और विवादास्पद पहलुओं पर भी चर्चा हुई, विशेष रूप से उनके नास्तिकता की ओर झुकाव और फांसी से ठीक पहले के उनके अंतिम क्षणों पर।
प्रश्न: भगत सिंह ने अपनी फांसी से ठीक पहले मैं नास्तिक क्यों हूँ जैसा प्रभावशाली निबंध लिखने का निर्णय क्यों लिया?
उत्तर (कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राज त्रिपाठी): शहीद मेला, बेवर, मैनपुरी के आयोजक राज त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि यह निबंध संस्कृति का त्याग नहीं बल्कि शुद्ध तर्क का परिणाम था। भगत सिंह ने सवाल उठाया था कि एक सर्वशक्तिमान और दयालु ईश्वर अपनी उपस्थिति में व्यवस्थागत गरीबी, निरक्षरता और छुआछूत जैसी अमानवीय प्रथाओं को कैसे अनुमति दे सकता है। उन्होंने अंधविश्वास को एक ऐसी बेड़ी के रूप में देखा जिसने जनता को औपनिवेशिक शासन के प्रति विनम्र बनाए रखा था। उनकी नास्तिकता यथास्थिति को तोड़ने और व्यवस्था से जवाबदेही मांगने का एक साधन थी।
प्रश्न: फांसी से ठीक पहले भगत सिंह जो पुस्तक पढ़ रहे थे, उसके मुड़े हुए पन्ने का क्या महत्व है?
उत्तर (प्रोफेसर जगमोहन सिंह): सिंह ने उल्लेख किया कि भगत सिंह लेनिन पर एक पुस्तक पढ़ रहे थे। जब गार्ड उन्हें फांसी के लिए ले जाने आए, तो उन्होंने उस पन्ने के कोने को मोड़ दिया जिसे वे पढ़ रहे थे। यह भारत के युवाओं के लिए एक शक्तिशाली अंतिम संदेश था कि पढ़ने, समझने और क्रांति को पूरा करने का कार्य अभी अधूरा है। वे अगली पीढ़ी को बौद्धिक मशाल सौंप रहे थे, यह संकेत देते हुए कि एक न्यायपूर्ण समाज के संघर्ष के लिए निरंतर अध्ययन की आवश्यकता है।
भगत सिंह के दृष्टिकोण के सामाजिक निहितार्थों को प्रोफेसर सिंह द्वारा साझा किए गए व्यक्तिगत संस्मरणों के माध्यम से विस्तार से समझाया गया। उन्होंने बताया कि कैसे भगत सिंह ने जेल के एक सफाई कर्मचारी को बेबे या मां कहकर संबोधित किया था, जो उस समय के जाति-आधारित ऊंच-नीच को एक कट्टर चुनौती थी। इसके अलावा, अपनी बहन को दिया गया उनका संदेश पूर्ण लैंगिक समानता का था, जिसमें उन्होंने उसे कभी भी समझौतावादी न बनने का आग्रह किया था।
कार्यक्रम का आर्थिक दृष्टिकोण बिहार दिवस पर केंद्रित रहा। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए टीफा26 सदस्य उदय शंकर सिंह कुशवाहा, समाजसेवी ने बिहार को गौतम बुद्ध, गुरु गोविंद सिंह और सम्राट अशोक की भूमि के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने याद दिलाया कि महात्मा गांधी ने चंपारण सत्याग्रह की शुरुआत बिहार से ही की थी, जिसने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को जन आंदोलन में बदल दिया था। हालांकि, प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने बिहार के विकास में बाधक रहे आर्थिक शोषण का विश्लेषण किया। उन्होंने बिहार, बंगाल और उड़ीसा की गरीबी का संबंध 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी की नीतियों से जोड़ा। उन्होंने बताया कि दादाभाई नौरोजी द्वारा वर्णित धन की निकासी इन्हीं पूर्वी प्रांतों से शुरू हुई थी।
विश्व जल दिवस के अवसर पर चर्चा का रुख समकालीन संकटों की ओर मुड़ा। पर्यावरण कार्यकर्ता राकेश मनचंदा ने पानी के व्यावसायीकरण की कड़ी आलोचना की। उन्होंने याद दिलाया कि पानी इस पृथ्वी पर इंसानों के आगमन से 4.5 अरब साल पहले से मौजूद है, इसलिए इस पर पशुओं और पक्षियों सहित सभी जीवित प्राणियों का अधिकार है। मनचंदा ने तर्क दिया कि पानी की कमी का वर्तमान नैरेटिव निजी हितों द्वारा प्राकृतिक संसाधनों की चोरी को सुविधाजनक बनाने के लिए बनाया गया एक कृत्रिम संकट है।
मनचंदा ने एक ऐसे भविष्य की चेतावनी दी जहां पानी के नल चलाने के लिए ओटीपी या अग्रिम भुगतान की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने टैंकर माफिया और भ्रष्ट अधिकारियों के बीच के गठजोड़ की आलोचना की। उन्होंने जोर दिया कि पानी का स्वामित्व एक सार्वजनिक अधिकार होना चाहिए, न कि एक बिल योग्य वस्तु।
उदय कुमार मन्ना ने आधुनिक युवाओं और देश के इतिहास के बीच बढ़ते अलगाव पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने एक हालिया अनुभव साझा किया जहां कई बच्चे 23 मार्च के महत्व को बताने में असमर्थ थे। मन्ना ने तर्क दिया कि यह बच्चों की नहीं बल्कि पिछली पीढ़ियों की विफलता है जो तिरंगे के पीछे के बलिदानों को संप्रेषित नहीं कर पा रही हैं। दिल्ली सरकार की पूर्व व्याख्याता सरिता कपूर ने कहा कि क्रांतिकारी जज्बे को दैनिक जीवन और ईमानदारी में लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने घर पर मेहमानों को आधा गिलास पानी देने जैसी छोटी लेकिन प्रभावी आदतों का सुझाव दिया।
प्रोफेसर जगमोहन सिंह ने युवाओं के लिए सफलता के तीन स्तंभ प्रस्तुत किए। पहला, शारीरिक स्वास्थ्य, जिसमें उन्होंने निर्जलीकरण से बचने के लिए हिमालयन नमक या सेंधा नमक के उपयोग का सुझाव दिया। दूसरा, बुद्धिमत्ता और मूर्खता के बीच अंतर करने के लिए विदुर नीति का अध्ययन। तीसरा, शारीरिक श्रम, क्योंकि अपने हाथों से काम करने से आत्मविश्वास पैदा होता है और यह मस्तिष्क को आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया के नियंत्रण से बचाता है।
यह 532वां कार्यक्रम भविष्य की गतिविधियों की एक स्पष्ट रूपरेखा के साथ संपन्न हुआ। 29 मार्च को टीफा26 व मीडिया कर्मियों के साथ कनाॅट प्लेस में एक विशेष बैठक निर्धारित है। 27 मार्च को सरिता कपूर विश्व रंगमंच दिवस पर एक कार्यक्रम को ऑर्गेनाइज करेंगी। इसके अतिरिक्त, फरवरी और मार्च की गतिविधियों को संकलित करने वाला एक संयुक्त न्यूज़लेटर महावीर जयंती पर 31 मार्च को पीडीएफ प्रारूप में जारी किया जाएगा।
इस संवाद का मुख्य निष्कर्ष यह था कि सकारात्मक भारत उदय आंदोलन को एक ऐसी मानसिक क्रांति को बढ़ावा देना चाहिए जो कर्मकांड के बजाय तर्क को, उपभोग के बजाय संरक्षण को और पारंपरिक पदानुक्रमों के बजाय सामाजिक समानता को महत्व दे। अगस्त 2026 का आगामी आज़ादी समारोह इस यात्रा का अगला प्रमुख मील का पत्थर होगा, जो शहीदों की विरासत को सम्मान देने के लिए प्रवासी भारतीयों और स्थानीय कार्यकर्ताओं को एक साथ लाएगा।
आकांक्षा मन्ना
हेड क्रिएटिव टीम
आरजेएस पीबीएस -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया 9811705015
Comments
Post a Comment