, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता पर आरजेएस कार्यक्रम आयोजित
सत्य, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता पर आरजेएस कार्यक्रम आयोजित
विश्व रंगमंच दिवस, सकारात्मक संवाद और महावीर जयंती का कार्यक्रम आयोजित करेगा आरजेएस पीबीएस
नई दिल्ली — भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 के संकल्पों को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से, राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया ने टीफा 26 सदस्य लक्ष्मण प्रसाद, निदेशक आरडी फूड प्रोडक्ट्स ,प्रभात नमकीन के सहयोग से "सत्य, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता" पर 26 मार्च 2026 को कार्यक्रम आयोजित किया गया।ये अवसर था रामनवमी, चक्रवर्ती सम्राट अशोक जयंती और दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन।
कार्यक्रम के सह-आयोजक लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अमृत काल का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहां शुद्धता और संस्कार में प्राथमिकता हो। उन्होंने कन्या पूजन की परंपरा को केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बालिकाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक निवेश की एक दीर्घकालिक रणनीति बताया। उनके अनुसार, उत्पादन में शुद्धता और समाज में समरसता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने अपनी प्रभात नमकीन ब्रांड गाइडलाइंस और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए उन्नत स्वचालन (ऑटोमेशन) को अपनाया है।
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों का दस्तावेजीकरण डिजिटल व प्रिंट में किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि चिन्मय जागृति श्रीराम मंदिर, पटियाला के आचार्य स्वामी माधवानंद ने भगवान राम को सच्चिदानंद (सत्य-चित्त-आनंद) के रूप में परिभाषित किया। स्वामी जी ने कहा कि आज का मनुष्य भी खुद को शेर समझकर अहंकार के दलदल में धंस रहा है। जब तक वह अपनी नियति और समाज के प्रति विनम्रता नहीं अपनाएगा, वह इस संकट से नहीं निकल पाएगा। किया। उन्होंने तर्क दिया कि राम केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे एक निरंतर मूल्य हैं जो हर काल में प्रासंगिक रहते हैं।
विशिष्ट अतिथि ब्रह्माकुमारी संस्थान, की प्रतिनिधि बीके मेधा बहन और बीके शिवांगी ने आधुनिक सामाजिक अस्थिरता का आध्यात्मिक विश्लेषण किया। उन्होंने समाज में बढ़ रही चिड़चिड़ाहट और अनुशासनहीनता का मुख्य कारण आत्मा की आंतरिक शक्ति के क्षरण को बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी में शिक्षकों और माता-पिता के प्रति सम्मान कम हो रहा है क्योंकि आत्मा की बैटरी डिस्चार्ज हो चुकी है।उन्होंने आहार शुद्धि (भोजन की शुद्धता) पर जोर देते हुए कहा कि व्यावसायिक रूप से तैयार किया गया भोजन व्यक्ति की मानसिक शांति को प्रभावित करता है, जबकि सेवा और प्रेम की भावना से बना भोजन मन को सकारात्मक बनाता है।उन्होंने तर्क दिया कि जब तक व्यक्ति ध्यान और योग के माध्यम से अपनी आंतरिक शक्ति को रिचार्ज नहीं करेगा, तब तक उच्च आदर्शों के प्रति उसका उत्साह जाग्रत नहीं होगा।
विशिष्ट अतिथि तथागत विचार मंच, दिल्ली के पुरोधा प्रमुख डॉ. एस.पी. सिंह ने सम्राट अशोक के जीवन के माध्यम से भारतीय धर्मनिरपेक्षता और संचार प्रणाली का एक नया विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने अशोक से धम्म-अशोक बनने की प्रक्रिया को रेखांकित करते हुए कहा कि अशोक दुनिया के पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने पंथ (सांप्रदायिकता) के बजाय धम्म (प्राकृतिक नैतिक नियम) को प्राथमिकता दी।डॉ. सिंह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि सम्राट अशोक ने शिलालेखों और स्तंभों (लाट) का चयन इसलिए किया क्योंकि वे उस समय के स्थायी मीडिया थे। पत्थर पर उकेरे गए संदेश कागज या मौखिक परंपरा की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं। अशोक का शेर और चक्र केवल प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह चारों दिशाओं में न्यायपूर्ण संचार और निरंतर प्रगति का प्रतीक है।
टीफा26 की सरिता कपूर विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च को , अशोक कुमार मलिक 29 मार्च को कनाॅट प्लेस में सकारात्मक संवाद और नितिन मेहता एमबीई 31 मार्च को आरजेएस का कार्यक्रम को-ऑरगेनाइज करेंगे।
कार्यक्रम में सरिता कपूर,डा.मुन्नी कुमारी,उदय शंकर सिंह कुशवाहा, राकेश मौर्य, स्वीटी पाॅल,राकेश मनचंदा,संजय देव, डीपी मौर्य, भानु प्रताप कुशवाहा, दयाराम सारोलिया,रेखा सारोलिया,आकांक्षा,बिन्दा मन्ना, मयंक राज, इशहाक खान, सुदीप साहू,दीपक कुशवाहा, राजकुमार, अर्जुन प्रसाद सिंह आदि ने प्रश्नकाल में भाग लिया।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के इस राष्ट्रीय विमर्श ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक समरसता केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि औद्योगिक नैतिकता, ऐतिहासिक गौरव और व्यक्तिगत आध्यात्मिक उत्थान के मेल से आएगी। प्रभात नमकीन की स्वचालन तकनीक से लेकर अशोक के शिलालेखों तक, संदेश एक ही है—स्थायित्व और शुद्धता।
यह दस्तावेजीकरण परियोजना 2047 के भारत के लिए एक बौद्धिक और नैतिक नींव रखने का प्रयास है। इस वेबिनार में शामिल विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से यह आह्वान किया कि विश्व परिवर्तन के लिए स्व-परिवर्तन अनिवार्य है। समाज में व्याप्त नकारात्मकता और तनाव के दलदल से निकलने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम अपने प्राचीन मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक और गरिमापूर्ण इतिहास का सृजन करें।
आकांक्षा मन्ना
हेड क्रिएटिव टीम
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया
9811705015
प्रेस विज्ञप्ति 27-03-2026
सत्य, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता पर आरजेएस कार्यक्रम आयोजित
विश्व रंगमंच दिवस, सकारात्मक संवाद और महावीर जयंती का कार्यक्रम आयोजित करेगा आरजेएस पीबीएस
नई दिल्ली — भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 के संकल्पों को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से, राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (आरजेएस पीबीएच) और आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया ने टीफा 26 सदस्य लक्ष्मण प्रसाद, निदेशक आरडी फूड प्रोडक्ट्स ,प्रभात नमकीन के सहयोग से "सत्य, शक्ति, अहिंसा और करुणा के माध्यम से सामाजिक समरसता" पर 26 मार्च 2026 को कार्यक्रम आयोजित किया गया।ये अवसर था रामनवमी, चक्रवर्ती सम्राट अशोक जयंती और दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन।
कार्यक्रम के सह-आयोजक लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अमृत काल का लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि एक ऐसा समाज बनाना है जहां शुद्धता और संस्कार में प्राथमिकता हो। उन्होंने कन्या पूजन की परंपरा को केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बालिकाओं के प्रति सम्मान और सामाजिक निवेश की एक दीर्घकालिक रणनीति बताया। उनके अनुसार, उत्पादन में शुद्धता और समाज में समरसता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने अपनी प्रभात नमकीन ब्रांड गाइडलाइंस और गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए उन्नत स्वचालन (ऑटोमेशन) को अपनाया है।
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि सभी कार्यक्रमों का दस्तावेजीकरण डिजिटल व प्रिंट में किया जा रहा है।
मुख्य अतिथि चिन्मय जागृति श्रीराम मंदिर, पटियाला के आचार्य स्वामी माधवानंद ने भगवान राम को सच्चिदानंद (सत्य-चित्त-आनंद) के रूप में परिभाषित किया। स्वामी जी ने कहा कि आज का मनुष्य भी खुद को शेर समझकर अहंकार के दलदल में धंस रहा है। जब तक वह अपनी नियति और समाज के प्रति विनम्रता नहीं अपनाएगा, वह इस संकट से नहीं निकल पाएगा। किया। उन्होंने तर्क दिया कि राम केवल एक ऐतिहासिक या धार्मिक व्यक्तित्व नहीं हैं, बल्कि वे एक निरंतर मूल्य हैं जो हर काल में प्रासंगिक रहते हैं।
विशिष्ट अतिथि ब्रह्माकुमारी संस्थान, की प्रतिनिधि बीके मेधा बहन और बीके शिवांगी ने आधुनिक सामाजिक अस्थिरता का आध्यात्मिक विश्लेषण किया। उन्होंने समाज में बढ़ रही चिड़चिड़ाहट और अनुशासनहीनता का मुख्य कारण आत्मा की आंतरिक शक्ति के क्षरण को बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी में शिक्षकों और माता-पिता के प्रति सम्मान कम हो रहा है क्योंकि आत्मा की बैटरी डिस्चार्ज हो चुकी है।उन्होंने आहार शुद्धि (भोजन की शुद्धता) पर जोर देते हुए कहा कि व्यावसायिक रूप से तैयार किया गया भोजन व्यक्ति की मानसिक शांति को प्रभावित करता है, जबकि सेवा और प्रेम की भावना से बना भोजन मन को सकारात्मक बनाता है।उन्होंने तर्क दिया कि जब तक व्यक्ति ध्यान और योग के माध्यम से अपनी आंतरिक शक्ति को रिचार्ज नहीं करेगा, तब तक उच्च आदर्शों के प्रति उसका उत्साह जाग्रत नहीं होगा।
विशिष्ट अतिथि तथागत विचार मंच, दिल्ली के पुरोधा प्रमुख डॉ. एस.पी. सिंह ने सम्राट अशोक के जीवन के माध्यम से भारतीय धर्मनिरपेक्षता और संचार प्रणाली का एक नया विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने अशोक से धम्म-अशोक बनने की प्रक्रिया को रेखांकित करते हुए कहा कि अशोक दुनिया के पहले ऐसे शासक थे जिन्होंने पंथ (सांप्रदायिकता) के बजाय धम्म (प्राकृतिक नैतिक नियम) को प्राथमिकता दी।डॉ. सिंह ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण बिंदु उठाया कि सम्राट अशोक ने शिलालेखों और स्तंभों (लाट) का चयन इसलिए किया क्योंकि वे उस समय के स्थायी मीडिया थे। पत्थर पर उकेरे गए संदेश कागज या मौखिक परंपरा की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं। अशोक का शेर और चक्र केवल प्रतीक नहीं हैं, बल्कि यह चारों दिशाओं में न्यायपूर्ण संचार और निरंतर प्रगति का प्रतीक है।
टीफा26 की सरिता कपूर विश्व रंगमंच दिवस 27 मार्च को , अशोक कुमार मलिक 29 मार्च को कनाॅट प्लेस में सकारात्मक संवाद और नितिन मेहता एमबीई 31 मार्च को आरजेएस का कार्यक्रम को-ऑरगेनाइज करेंगे।
कार्यक्रम में सरिता कपूर,डा.मुन्नी कुमारी,उदय शंकर सिंह कुशवाहा, राकेश मौर्य, स्वीटी पाॅल,राकेश मनचंदा,संजय देव, डीपी मौर्य, भानु प्रताप कुशवाहा, दयाराम सारोलिया,रेखा सारोलिया,आकांक्षा,बिन्दा मन्ना, मयंक राज, इशहाक खान, सुदीप साहू,दीपक कुशवाहा, राजकुमार, अर्जुन प्रसाद सिंह आदि ने प्रश्नकाल में भाग लिया।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के इस राष्ट्रीय विमर्श ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सामाजिक समरसता केवल राजनीतिक नारों से नहीं, बल्कि औद्योगिक नैतिकता, ऐतिहासिक गौरव और व्यक्तिगत आध्यात्मिक उत्थान के मेल से आएगी। प्रभात नमकीन की स्वचालन तकनीक से लेकर अशोक के शिलालेखों तक, संदेश एक ही है—स्थायित्व और शुद्धता।
यह दस्तावेजीकरण परियोजना 2047 के भारत के लिए एक बौद्धिक और नैतिक नींव रखने का प्रयास है। इस वेबिनार में शामिल विशेषज्ञों ने सामूहिक रूप से यह आह्वान किया कि विश्व परिवर्तन के लिए स्व-परिवर्तन अनिवार्य है। समाज में व्याप्त नकारात्मकता और तनाव के दलदल से निकलने का एकमात्र रास्ता यही है कि हम अपने प्राचीन मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में अपनाएं और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सकारात्मक और गरिमापूर्ण इतिहास का सृजन करें।
आकांक्षा मन्ना
हेड क्रिएटिव टीम
आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया
9811705015
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