'सकारात्मक भारत' का वैश्विक विजन: आरजेएस ने 17-सूत्रीय रोडमैप जारी किया.

 'सकारात्मक भारत' का वैश्विक विजन: आरजेएस ने 17-सूत्रीय रोडमैप जारी किया.
गुरु रविदास जयंती के उपलक्ष्य में आरजेसियंस का सकारात्मक संकल्प के साथ संचार कौशल पर चर्चा.
सकारात्मक आयोजन में अग्रणी बने दयाराम सारोलिया, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, दयाराम मालवीय और कमल मालवीय.
नई दिल्ली – प्राचीन विरासत और आधुनिक आकांक्षाओं के बीच एक मजबूत सेतु बनाते हुए, राम जानकी संस्थान (आरजेएस) पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (पीबीएच) ने अपने 519वें राष्ट्रीय वेबिनार में भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष 2047 तक एक 'सकारात्मक भारत' के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। "अमृत काल का सकारात्मक भारत उदय" विषय पर संचार कौशल आधारित इस वैश्विक वेबिनार में , सकारात्मक बोध व संकल्प और संचार कौशल के वैज्ञानिक विरासत को स्थापित करने के उद्देश्य से  17-सूत्रीय एजेंडा लॉन्च किया गया। गुरु रविदास जयंती 1 फरवरी 2026 के उपलक्ष्य में 31 जनवरी को आयोजित संगोष्ठी में फरवरी माह के लिए सकारात्मक आयोजन में दयाराम सारोलिया, राजेन्द्र सिंह कुशवाहा, दयाराम मालवीय और कमल मालवीय अग्रणी भूमिका निभाने का संकल्प लिए. बाकी लोगों ने कार्यक्रमों में केवल जुड़ने का संकल्प दुहराया।
कार्यक्रम की कमान संभालते हुए राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने स्पष्ट किया कि यह वेबिनार केवल एक चर्चा नहीं, बल्कि एक 'संकल्प सभा' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कार्यक्रमों का डिजिटल प्रलेखन (डॉक्यूमेंटेशन) किया जा रहा है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक स्थायी संसाधन बनेगा। मन्ना ने बताया कि अगस्त 2026 में एक विस्तृत 'ग्रंथ' 07(पुस्तक) का विमोचन किया जाएगा, जिसमें आंदोलन से जुड़े टीफा26 के हर व्यक्ति के योगदान को दर्ज किया जाएगा।
संगोष्ठी में अमेरिका से जुड़े हृदय रोग विशेषज्ञ और सांस्कृतिक राजदूत डॉ. पंकज पारीक, आकाशवाणी , दिल्ली की अनुभवी समाचार वाचिका रही चंद्रिका जोशी,मीडिया शिक्षाविद डॉ. अरुणेश कुमार द्विवेदी और वैश्विक विचारक राकेश मनचंदा ने प्रतिभागियों को सकारात्मक बोध और संचार कौशल के टिप्स दिए।

वेबिनार का एक मुख्य आकर्षण अमेरिका से जुड़े हृदय रोग विशेषज्ञ और सांस्कृतिक राजदूत डॉ. पंकज पारीक का संबोधन रहा। डॉ. पारीक ने चिकित्सा इतिहास के पश्चिमी-केंद्रित नजरिए को चुनौती देते हुए टीकाकरण (वैक्सीनेशन) के भारतीय मूल होने के प्रमाण प्रस्तुत किए। 18वीं सदी के ब्रिटिश मेडिकल जर्नल्स और चेन्नई के डॉ. हरि हांडे के शोध का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि एडवर्ड जेनर की 1796 की खोज से लगभग 100 साल पहले भारत में टीकाकरण तकनीक का अभ्यास किया जा रहा था।

डॉ. पारीक ने कहा, "ब्रिटिश पत्रकारों ने सदियों पहले भारत के गांवों में 'मोबाइल वैद्यों' को चेचक का टीकाकरण करते देखा था। भारत को केवल 'गाय और गोबर' का देश बताना गलत है; यह कला, विज्ञान और व्यापार में विश्व गुरु था।" उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों को सही करने का आह्वान करते हुए यह भी बताया कि मूल वाल्मीकि रामायण में 'लक्ष्मण रेखा' जैसी कहानियों का कोई उल्लेख नहीं है, और युवाओं को वास्तविक साक्ष्यों पर आधारित इतिहास की खोज करनी चाहिए।

राष्ट्रीय अस्मिता की इस चर्चा को आगे बढ़ाते हुए आकाशवाणी की अनुभवी समाचार वाचिका चंद्रिका जोशी ने संचार कौशल और मानवीय संवेदनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रेडियो जैसे माध्यम में, जहाँ वक्ता अदृश्य होता है, मानवीय आवाज़ को 'संस्कार' और सहानुभूति का वाहक होना चाहिए। कोरोना महामारी का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कैसे रेडियो उद्घोषकों ने बीमार लोगों से जुड़कर उन्हें भावनात्मक सहारा दिया। जोशी ने देशभक्ति को परिभाषित करते हुए कहा, "राष्ट्रभक्ति केवल नारों में नहीं, बल्कि अनुशासन, विनम्रता और बड़ों के प्रति सम्मान में निहित है। यही देशभक्ति की असली शाखाएं हैं।"

मीडिया शिक्षाविद डॉ. अरुणेश कुमार द्विवेदी ने "पावर टू एम्पॉवर" (सशक्त बनाने की शक्ति) का मंत्र दिया। उन्होंने 'डिजिटल इंडिया' पहल का संदर्भ देते हुए कहा कि मीडिया की असली शक्ति हाशिए पर पड़े लोगों को सशक्त बनाने में है। उन्होंने एक सिख ऑटो-ड्राइवर का प्रेरक उदाहरण दिया, जिसने कोरोना काल में मुफ्त सेवाएं दीं। डॉ. द्विवेदी ने पत्रकारों से आग्रह किया कि वे 'सरल और सहज' भाषा का प्रयोग करें ताकि सूचनाएं केवल शिक्षित वर्ग तक ही नहीं, बल्कि किसानों और श्रमिकों तक भी प्रभावी ढंग से पहुंच सकें।

वेबिनार में आरजेएस पीबीएच के 17-सूत्रीय 'सकारात्मक भारत उदय' एजेंडे का विस्तार से विवरण दिया गया। इस रोडमैप में 'रियल सक्सेस स्टोरी शो' के माध्यम से गुमनाम नायकों को मंच देना, सार्वजनिक पार्कों में 'पब्लिक कॉर्नर्स' की स्थापना करना और भारतीय प्रवासियों को 2047 के विजन से जोड़ने के लिए एक 'ग्लोबल डायस्पोरा टीम' का गठन शामिल है। उदय मन्ना ने बताया कि इस अभियान को गति देने के लिए एक मासिक  पाॅजिटिव मीडिया न्यूज़लेटर जनवरी अंक भी जारी की गई है।

कार्यक्रम के दौरान 'जेन-जी' (Gen-Z) यानी नई पीढ़ी को सकारात्मक सामग्री से जोड़ने की चुनौती पर भी चर्चा हुई। डॉ. पारीक और चंद्रिका जोशी ने सुझाव दिया कि युवाओं में भावनात्मक लचीलापन और आत्मविश्वास पैदा करने के लिए उन्हें साक्ष्य-आधारित इतिहास और "नर हो, न निराश करो मन को" जैसी मूल्य-आधारित कविताओं से परिचित कराना अनिवार्य है।

वैश्विक विचारक राकेश मनचंदा ने बुद्ध की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि आंतरिक मानसिक संतुलन ही आधुनिक चुनौतियों और सामाजिक कलह से निपटने की कुंजी है। उन्होंने कहा कि जब तक पूरा मोहल्ला, राष्ट्र और विश्व सुखी नहीं है, तब तक व्यक्तिगत सुख अस्थायी है।

वेबिनार के समापन सत्र में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को केंद्र में रखा गया। संत रविदास की जयंती के अवसर पर उन्हें नमन करते हुए उनके समानता और मानवता के संदेश को दोहराया गया। लोक गायिका मधुबाला श्रीवास्तव ने कबीर का भजन "दाग कहाँ लागत चुनरी में" गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके साथ ही दयाराम सरोलिया और कमल मालवीय जैसे कलाकारों ने 'संस्कारी गीतों' और लोक परंपराओं को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया।

अंत में, उदय मन्ना ने संत रविदास के प्रसिद्ध कथन "मन चंगा तो कठौती में गंगा" का उल्लेख करते हुए कहा कि मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने 12 फरवरी को नोएडा के मारवाह स्टूडियो में आयोजित होने वाले 'मीडिया साक्षरता सेमिनार' की घोषणा की, जहाँ अंतरराष्ट्रीय मीडिया जगत के दिग्गज सकारात्मक पत्रकारिता पर मंथन करेंगे। यह वेबिनार इस सामूहिक सहमति के साथ समाप्त हुआ कि भारत को 2047 तक सशक्त बनाने के लिए वैज्ञानिक गौरव, समाधान-आधारित मीडिया और व्यक्तिगत उत्तरदायित्व का संगम अनिवार्य है।

आकांक्षा मन्ना 
हेड क्रिएटिव टीम 
आरजेएस पीबीएस -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया 
9811705015

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